RNI No.: MPBIL/2015/64672   |   Po. Reg.: Malwa Division/345/2024-2026

वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में बढ़ोतरी से आर्बिट्राज फंडों पर दबाव पड़ने की आशंका है। आर्बिट्राज फंड अतिरिक्त नकदी जमा करने के लिए निवेशकों का पसंदीदा शॉर्ट-टर्म निवेश विकल्प हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले वित्त वर्ष से अधिक एसटीटी लागू होने के बाद रिटर्न में 30 से 50 आधार अंक की गिरावट आ सकती है।

आर्बिट्राज फंड नकदी और डेरिवेटिव बाजारों के बीच कीमतों में अंतर का फायदा उठाकर रिटर्न पैदा करने के उद्देश्य से एफएंडओ सेगमेंट में भारी मात्रा में लेनदेन करते हैं। यह श्रेणी हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़ी है, खासकर वर्ष 2023 में डेट फंड कराधान में बदलाव के बाद इसमें अच्छी तेजी आई है। जनवरी 2023 और दिसंबर 2025 के बीच आर्बिट्राज फंडों द्वारा प्रबंधित परिसंपत्तियां लगभग चार गुना बढ़कर 2.8 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं।

बाजार में सबसे बड़े खिलाड़ी आर्बिट्राज फंड हैं। एसटीटी में वृद्धि के कारण अगले साल उनका रिटर्न लगभग 0.5 प्रतिशत गिर जाएगा। एक विश्लेषण के अनुसार एसटीटी में वृद्धि से औसतन 70 प्रतिशत पर आर्बिट्राज रणनीति जोखिम को देखते हुए वार्षिक आधार पर आर्बिट्राज फंडों का रिटर्न 0.32 प्रतिशत अंक घट सकता है।

विश्लेषण से पता चला है कि आर्बिट्राज फंड कराधान में बड़े अंतर को देखते हुए अभी भी लिक्विड फंडों को पीछे छोड़ने में कामयाब हो सकते हैं। आर्बिट्राज फंडों से रिटर्न पर 12.5 प्रतिशत कर लगता है बशर्ते एक वर्ष से अधिक समय के लिए निवेश किया जाए, क्योंकि वे इक्विटी कराधान के तहत आते हैं। लिक्विड फंड या किसी अन्य डेट फंड के मामले में यह 30 प्रतिशत से अधिक हो सकता है क्योंकि रिटर्न पर निवेशकों के स्लैब के अनुसार कर लगता है।

कम रिटर्न से आर्बिट्राज फंडों का आकर्षण कम होगा, लेकिन वे शॉर्ट-टर्म निवेश के लिए पसंदीदा विकल्प बने रह सकते हैं। एफएंडओ पर ज्यादा एसटीटी से इक्विटी हाइब्रिड योजनाओं को भी नुकसान होगा जो आर्बिट्राज रणनीति का इस्तेमाल करती हैं। इक्विटी सेविंग्स फंड और कुछ मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड कुछ हद तक आर्बिट्राज का इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूचुअल फंडों में नए शुरू किए गए सेगमेंट ‘स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स’ (एसआइएफ) की ज्यादातर योजनाओं पर भी कुछ असर पड़ेगा।