RNI No.: MPBIL/2015/64672   |   Po. Reg.: Malwa Division/345/2024-2026

1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। यह उनका लगातार नौवाँ बजट है, जो भारत को 2047 तक एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के संकल्प को दोहराता है। बजट 2026 मुख्य रूप से तीन स्तंभों—आर्थिक विकास, आकांक्षाओं की पूर्ति और समावेशी विकास—पर आधारित है। इस लेख में हम बजट की प्रमुख घोषणाओं, टैक्स स्लैब में बदलाव, और आम आदमी पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

1. बजट के तीन ‘कर्तव्य’ और मुख्य आंकड़े-

सरकार ने इस बजट को ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार किया गया पहला बजट बताया है, जो राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

  • कुल व्यय: सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रु. 53.5 लाख करोड़ के कुल खर्च का अनुमान लगाया है।

  • राजकोषीय घाटा: सरकार ने इसे GDP के 4.3% पर रखने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के 4.4% से कम है। यह वित्तीय अनुशासन की ओर एक सकारात्मक कदम है।

  • पूंजीगत व्यय: बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए कैपेक्स को बढ़ाकर रु. 12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है।

2. आयकर : मध्यम वर्ग को क्या मिला?- बजट 2026 में मध्यम वर्ग और वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। हालांकि, मुख्य टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ राहत और सरलीकरण के उपाय ज़रूर दिए गए हैं।

नई कर व्यवस्था के स्लैब: वित्त वर्ष 2026-27 (असेसमेंट ईयर 2027-28) के लिए स्लैब इस प्रकार हैं:

आय सीमा (₹) टैक्स दर (%)
0 से 4 लाख तक शून्य
4 लाख से 8 लाख 5%
8 लाख से 12 लाख 10%
12 लाख से 16 लाख 15%
16 लाख से 20 लाख 20%
20 लाख से 24 लाख 25%
24 लाख से अधिक 30%

प्रमुख लाभ:

  • धारा 87A के तहत छूट: रु. 12 लाख तक की कर योग्य आय वाले व्यक्तियों को कोई कर नहीं देना होगा (रिबेट के कारण)।

  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: वेतनभोगी वर्ग के लिए रु. 75,000 की मानक कटौती जारी रखी गई है।

  • संशोधित रिटर्न (Revised ITR): इसकी समय सीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है।

3. क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा?- आम आदमी के घरेलू बजट पर इस घोषणा का सीधा असर पड़ता है:

  • सस्ता: सोलर उपकरण, मोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, कैंसर और शुगर की दवाएं, जूते, कपड़ा और सीएनजी (CNG)

  • महंगा: शराब (Alcoholic Liquor), स्क्रैप (Scrap) और कुछ विशिष्ट खनिज।

4. बुनियादी ढांचा और परिवहन (Infrastructure)- सरकार ने ‘गति शक्ति’ मिशन को आगे बढ़ाते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश का प्रस्ताव रखा है।

  • रेलवे: 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाला एक नया ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (Dankuni mes Surat) बनाने की योजना है।

  • जलमार्ग: अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किए जाएंगे।

  • शहरी विकास: ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन्स’ (CERs) के तहत शहरों को विकास के इंजन के रूप में विकसित करने के लिए रु. 5,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

5. मैन्युफैक्चरिंग और MSME सेक्टर- भारत को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने के लिए बजट में विशेष ध्यान दिया गया है:

  • SME विकास निधि: ‘चैंपियन MSMEs’ बनाने के लिए रु. 10,000 करोड़ का कोष प्रस्तावित किया गया है।

  • सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए आवंटन बढ़ाकर रु. 40,000 करोड़ किया गया है।

  • बायोफार्मा शक्ति: घरेलू स्तर पर दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रु. 10,000 करोड़ की योजना शुरू की गई है।

6. अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं- पर्यटन (Tourism): ओडिशा में ‘टर्टल ट्रेल’ और तमिलनाडु-आंध्र प्रदेश में ‘बर्ड वॉचिंग ट्रेल’ विकसित किए जाएंगे। 15 पुरातात्विक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थलों में बदला जाएगा।

  • शिक्षा और कौशल: रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट’ (E2E) स्थायी समिति का गठन किया जाएगा। 1.5 लाख कैडेट्स को मल्टी स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी।

  • विदेशी संपत्ति: छोटे करदाताओं को अपनी विदेशी संपत्तियों का खुलासा करने के लिए 6 महीने की एक विशेष योजना (Disclosure Scheme) दी गई है।

7. निष्कर्ष: भविष्य का रोडमैप- बजट 2026-27 स्पष्ट रूप से एक संतुलित बजट है। जहां एक ओर सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करके वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश के जरिए रोज़गार सृजन का मार्ग प्रशस्त किया है। मध्यम वर्ग के लिए टैक्स दरों में कोई बड़ी कटौती न होना थोड़ी निराशाजनक हो सकती है, लेकिन अनुपालन का सरलीकरण और डिजिटल सुधार एक स्वागत योग्य कदम है।

कुल मिलाकर, यह बजट ‘अमृत काल’ की नींव को मजबूत करने और डिजिटल से लेकर औद्योगिक क्रांति तक भारत की पकड़ को पुख्ता करने वाला दस्तावेज़ है।