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निवेशक निवेश करते समय रिटर्न को तो ध्यान में रखते हैं पर महंगाई दर को नज़रअंदाज कर देते हैं। वे यह तो समझते हैं कि चक्रवर्ती ब्याज से उनको फायदा तो होता है परन्तु वे यह भूल जाते हैं कि लम्बी अवधि में महंगाई दर उसी दर से निवेश का मूल्य घटा देती है।

कई निवेशक हमारे पास रिटायरमेंट प्लानिंग के लिये आते हैं। अधिकतर उनमें ऐसे निवेशक होते हैं जो रिटायर हो चुके हैं और अपनी बचत को निवेश करके बस अपना महीने का खर्च निकल जाये इतना रिटर्न चाहते हैं। उदाहरण के तौर पर एक निवेशक ने हमसे कहा कि मुझे मासिक खर्च रु. 40000/- के बराबर हर महीने का रिटर्न निकाल कर दे दें। उनके पास कुल 80 लाख की राशि है निवेश करने के लिये। इस राशि को अगर 6% की एफ.डी. में भी रखा जाये तो उनकी जरुरत पूरी हो जायेगी। यह 1-2 साल तक तो ठीक बनेगा। पर उसके बाद जब मासिक खर्च बढ़ेगा तब क्या होगा? यहाँ पर महँगाई दर का जिक्र तो हुआ ही नहीं।

ऐसा लगभग 99% निवेशक करते हैं। वे बस यह सोचते हैं कि हमारा निवेश रिटायरमेंट के बाद होने वाले मासिक खर्च के बराबर रिटर्न दे दे। वे ये भूल जाते हैं कि आज का औसत मासिक खर्च हर वर्ष 9-10% के हिसाब से बढ़ जाता है तो हम सिर्फ आज की सोच के कैसे प्लान कर सकते हैं? इसी उदाहरण में महँगाई दर के कारण 2 साल बाद उनके निवेश की मूल रकम कम होनी शुरू हो जायेगी क्योंकि उन्होंने निवेश करते समय महंगाई दर को ध्यान में नहीं रखा।

जिन निवेशकों का रिटायरमेंट अभी दूर है उन्हें चाहिये कि वे निवेश सोच समझकर करें। सिर्फ कल्पनाओं के आधार पर बिना योजना और विकल्प को परखें बिना निवेश करेंगे तो रिटायरमेंट के समय आपको ही समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

क्या करना चाहिये?

  1. रिटायरमेंट के नजदीक/रिटायर्ड निवेशक – ऐसे निवेशकों को चाहिये कि वे निवेश करते समय महँगाई दर को ध्यान में रखकर निवेश का विकल्प चुनें। ऊपर के उदाहरण में अगर निवेशक ऐसा विकल्प चुनें जो महँगाई दर से ज्यादा रिटर्न दे तो उसका निवेश कम नहीं पड़ेगा और मूल राशि भी कम नही होगी।

  2. रिटायरमेंट में समय है – ऐसे निवेशक जिनका रिटायरमेंट अभी दूर है तो उन्हें थोड़ा जोखिम लेकर ज्यादा से ज्यादा रकम जोड़ने की कोशिश करना चाहिये। उन्हें कोशिश करना चाहिये कि लंबी अवधि में ऐसा निवेश चुने जो महंगाई दर को मात दे सके।

नोट – याद रखें कि महंगाई दर और टैक्स आपके निवेश पर असर करती है तो उन्हें ध्यान में रखके निवेश करना ही लाभदायक होता है।