RNI No.: MPBIL/2015/64672   |   Po. Reg.: Malwa Division/345/2024-2026

8 अप्रैल 2026 को, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नए वित्तीय वर्ष (2026-27) की पहली पॉलिसी का एलान किया। दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल को देखते हुए RBI ने फिलहाल “रुको और देखो” (wait-and-watch) का रास्ता चुना है और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

1. मुख्य दरें 

RBI ने ब्याज दरों को जस का तस रखने का फैसला किया है:

  • रेपो रेट (Repo Rate): 5.25% पर स्थिर।

  • SDF: 5.00%

  • MSF और बैंक रेट: 5.50%

  • पॉलिसी का रुख: इसे “Neutral” (तटस्थ) रखा गया है, यानी आगे ज़रूरत पड़ने पर दरें घटाई या बढ़ाई जा सकती हैं।

2. भविष्य का अनुमान 

बाहरी झटकों की वजह से RBI ने विकास दर के अनुमान को थोड़ा घटाया है:

  • GDP ग्रोथ: 6.9% रहने का अनुमान (जो पिछले साल 7.6% था)। साल के आखिर तक इसमें धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।

  • महंगाई (Inflation): 4.6% रहने का अनुमान है। पहली बार RBI ने ‘कोर इंफ्लेशन’ (खाने-पीने और ईंधन को छोड़कर) का अलग से अनुमान दिया है, जो 4.4% है।

3. खतरे के संकेत 

गवर्नर ने दो बड़े खतरों के बारे में बताया है:

  • पश्चिमी एशिया का संघर्ष: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की वजह से समुद्री रास्तों में दिक्कत आ रही है, जिससे सामान लाने-ले जाने का खर्च बढ़ गया है।

  • अल नीनो (El Niño): मानसून खराब होने की आशंका है, जिससे खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं।

आपके लिए इसका क्या मतलब है? )

कैटेगरी आप पर असर
कर्ज लेने वाले (Borrowers) EMI स्थिर रहेगी: चूंकि रेपो रेट नहीं बढ़ा है, इसलिए आपके होम और ऑटो लोन की ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रहेंगी।
निवेशक (Investors) मिला-जुला असर: बाज़ार के लिए RBI का रुख ठीक है, लेकिन कम GDP ग्रोथ का मतलब है कि कंपनियों की कमाई में थोड़ी सुस्ती रह सकती है।
फिक्स्ड इनकम (FD आदि) रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है: महंगाई काबू में होने और तेल की कीमतें घटने से बांड्स और अन्य फिक्स्ड रिटर्न वाली चीज़ों का मुनाफा थोड़ा कम हो सकता है।

काम की बात

RBI फिलहाल दुनिया भर में चल रहे तूफानों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के “जहाज़ को थामे हुए” है। देश की आर्थिक बुनियाद मज़बूत है, लेकिन दरें तब तक कम नहीं की जाएंगी जब तक कि तनाव कम न हो जाए और मानसून की स्थिति साफ़ न हो जाए।