RNI No.: MPBIL/2015/64672   |   Po. Reg.: Malwa Division/345/2024-2026

आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और जेनेटिक कारणों से कैंसर, हार्ट स्ट्रोक, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं। एक साधारण हेल्थ इंश्योरेंस शायद इन बड़ी बीमारियों के लंबे इलाज का पूरा खर्चा न उठा पाए। ऐसे में “क्रिटिकल इलनेस (CI) प्लान” एक मज़बूत ढाल का काम करता है। इसे कम उम्र में लेना फायदेमंद है क्योंकि तब प्रीमियम कम होता है और आपको सेक्शन 80D के तहत टैक्स में छूट भी मिलती है।

1. यह काम कैसे करता है?

यह प्लान बाकी हेल्थ इंश्योरेंस से अलग है:

  • एकमुश्त भुगतान: जैसे ही बीमारी का पता चलता है, कंपनी बीमे की पूरी रकम (Sum Insured) आपको एक साथ दे देती है।

  • पैसे का इस्तेमाल: आप इन पैसों का उपयोग इलाज के लिए, घर के खर्च चलाने के लिए या पुराना कर्ज़ चुकाने के लिए भी कर सकते हैं।

  • एक से ज़्यादा पॉलिसी: अगर आपके पास दो कंपनियों से यह प्लान है, तो दोनों ही कंपनियाँ आपको पूरा पैसा देंगी।

2. इसमें क्या-क्या कवर होता है?

आमतौर पर कंपनियाँ 10-20 बड़ी बीमारियाँ कवर करती हैं। इनमें मुख्य हैं: कैंसर, बाईपास सर्जरी, हार्ट अटैक, किडनी फेल होना, अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) और लकवा (Paralysis)। हमेशा ऐसा प्लान चुनें जो ज़्यादा से ज़्यादा बीमारियों को कवर करे।

3. कितने का बीमा (Cover) लेना चाहिए?

बीमा चुनते समय अपनी उम्र, महंगाई और भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखें। सलाह दी जाती है कि क्रिटिकल इलनेस कवर कम से कम ₹15 लाख का होना चाहिए।

4. आम गलतियाँ जो लोग करते हैं

  • राइडर बनाम अलग पॉलिसी: लोग अक्सर इसे अपनी पुरानी पॉलिसी के साथ एक ‘एक्स्ट्रा’ (Rider) के रूप में ले लेते हैं। इसकी जगह एक अलग (Standalone) पॉलिसी लेना बेहतर है क्योंकि उसमें ज़्यादा बीमारियाँ कवर होती हैं और बीमे की रकम (Sum Insured) भी ज़्यादा मिल सकती है।

  • कम बीमा लेना: बहुत कम रकम का बीमा लेना भी एक बड़ी गलती है।

  • देर से खरीदना: ज़्यादा उम्र में खरीदने पर प्रीमियम बहुत ज़्यादा देना पड़ता है और बीमारियाँ कवर होने की लिमिट भी लग सकती है।

5. वेटिंग और सर्वाइवल पीरियड (ज़रूरी नियम)

  • 90 दिन का इंतज़ार: नई पॉलिसी लेने के पहले 90 दिनों तक आप क्लेम नहीं कर सकते।

  • 30 दिन का सर्वाइवल: बीमारी का पता चलने के बाद व्यक्ति का कम से कम 30 दिन तक जीवित रहना ज़रूरी है, तभी क्लेम मिलता है।

  • एक बार पूरा पैसा मिलने के बाद यह पॉलिसी खत्म हो जाती है।