रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स इस साल आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने पर विचार कर रही है। इसके तहत कंपनी के 2.5 फीसदी शेयर जारी किए जाएंगे। सूत्रों ने कहा कि यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है और इससे 4 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए जा सकते हैं। मुकेश अंबानी की अगुआई वाली कंपनी भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार ऑपरेटर रिलायंस जियो की मूल कंपनी है और उसके 50 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। यह इस वर्ष देश का सबसे बहुप्रतीक्षित आईपीओ है। नवंबर में निवेश बैंक जेफरीज ने अनुमान लगाया था कि रिलायंस जियो का मूल्यांकन 180 अरब डॉलर है। इस मूल्यांकन पर 2.5 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री से 4.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकेंगे जिससे 2024 में आए झुंडे मोटर इंडिया के 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ इसके सामने छोटा हो जाएगा। पिछले छह वर्षों में जियो ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कदम बढ़ाए हैं और केकेआर, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और अबु धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी सहित जाने-माने निवेशकों से धन जुटाया है।

सूत्र ने बताया, अगर कानून में बदलाव होता है तो फिलहाल 2.5 फीसदी हिस्सेदारी सूचीबद्ध कराना प्राथमिकता है क्योंकि कम हिस्सेदारी से मूल्य निर्धारण के दबाव बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ बैंकर इस कारोबार के लिए 200 अरब डॉलर से 240 अरब डॉलर के मूल्यांकन का प्रस्ताव दे रहे हैं, हालांकि रिलायंस ने अभी तक कोई पक्का आंकड़ा तय नहीं किया है।

रायटर्स के टिप्पणी के अनुरोधों पर रिलायंस ने कोई जवाब नहीं दिया। सूत्रों ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार नहीं है।

आईपीओ बाजार का जलवा- अभी यह तय नहीं है कि जियो का आईपीओ ऑफर फॉर सेल होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों को अपने शेयर आम जनता को बेचने की अनुमति होती है या इसमें नए शेयर जारी किए जाएंगे। उदाहरण के लिए, झुंड का भारतीय आईपीओ ऑफर फॉर सेल था और उससे कोई नया फंड नहीं जुटाया गया था। जियो की लिस्टिंग से भारत के आईपीओ बाजार को पिछले कुछ वर्षों में मिली मजबूती को और बल मिलेगा। एलएसईजी के आंकड़ों के अनुसार 2025 में यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राथमिक इक्विटी जारी करने वाला बाजार बन गया था, जहां 18 दिसंबर तक 21.6 अरब डॉलर जुटाए गए थे। रॉयटर्स को सूत्रों ने पहले बताया था कि रिलायंस अपनी रिटेल यूनिट को भी लिस्ट कराने की योजना बना रही है। लेकिन इसकी संभावना 2027 या 2028 से पहले नहीं है।

2019 में, अंबानी ने पांच साल के भीतर जियो को सूचीबद्ध कराने की योजना का पहली बार संकेत दिया था। पिछले साल रॉयटर्स ने खबर दी थी कि उन्होंने पेशकश को 2025 के बाद के लिए टाल दिया क्योंकि कंपनी अन्य विशिष्ट डिजिटल व्यवसायों में विस्तार करके उच्च मूल्यांकन प्राप्त करना चाहती थी।

प्रॉसपेक्टस पर दो बैंक कर रहे काम- रिलायंस जियो और ईलॉन मस्क की कड़ी टक्कर होने वाली है। मस्क की स्टारलिंक आने वाले महीनों में भारत में इंटरनेट सेवा शुरू करने वाले हैं। जियोने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ साझेदारी भी की है। अगस्त में अंबानी कहा था कि जियो 2026 की पहली छमाही में सूचीबद्ध होगी। सूत्रों में से एक ने बताया कि लिस्टिंग की समयसीमा बाजार की स्थितियों पर निर्भर करती है।

रिलायंस जियो को एलन मस्क से कड़ी टक्कर मिलने वाली है, जो आने वाले महीनों में भारत में स्टारलिंक इंटरनेट सेवा शुरू करने वाले हैं। जियो ने एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ भी साझेदारी की है। अगस्त में अंबानी ने कहा था कि जियो 2026 की पहली छमाही में सूचीबद्ध होगी। एक सूत्र ने बताया कि लिस्टिंग का समय बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा। हालांकि अभी औपचारिक नियुक्ति नहीं की गई हैं। लेकिन मॉर्गन स्टैनली और भारत के कोटक बैंक के बैंकर पहले से ही रिलायंस साथ जियो आईपीओ के कागजात तैयार करने पर काम कर रहे हैं, जो एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।