शेयर बाज़ारों में सुस्त रिटर्न के कारण 2025 में डीमैट खातों की संख्या में बढ़ोतरी आधी रह गई । इस दौरान डीमैट खातों की संख्या में 3.06 करोड़ का इजाफा हुआ । इसका मतलब है कि औसतन हर महीने 26 लाख नए खाते जुड़े । पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नए डीमैट खातों में 33 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले 2025 में 17 फीसदी की ही बढ़ोतरी हुई । 17 फीसदी की इस बढ़त से डीमैट की कुल संख्या 21.6 करोड़ हो गई । डीमैट खातों का उपयोग शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखने के लिए किया जाता है ।
2025 में भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला । निवेशक कंपनियों की आय में गिरावट और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता से जूझते रहे । पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी दंडात्मक टैरिफ लगाया था और तब से बातचीत जारी है । फिर भी भारत के अनुकूल कोई सकारात्मक प्रगति नहीं हुई है ।
2025 में बेंचमार्क सेंसेक्स में 9.06 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई जबकि निफ्टी 10.5 फीसदी बढ़ा । व्यापक निफ्टी मिडकैप 100 में 5.7 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.62 फीसदी की गिरावट आई । लेकिन सूचकांकों के ये रिटर्न व्यापक बाजार में आई भारी गिरावट की
भयावह वास्तविकता को छिपाते हैं । शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध शेयरों में से लगभग 60 फीसदी ने नकारात्मक रिटर्न दिया है ।
डीमैट खातों की वृद्धि दो बातों पर निर्भर करती है । एक तो नए निवेशकों का बाजार में आना और दूसरा मौजूदा निवेशकों का एक ब्रोकर से दूसरे ब्रोकर में जाना । मुझे लगता है कि ब्रोकर बदलने का यह चलन पिछले साल कम हुआ । इसके अलावा, पिछले साल द्वितीयक बाजार बीच-बीच में गिरावट के दौर से गुजर रहे थे ।
कोविड-19 के बाद से डीमैट खातों में भारी वृद्धि हुई है । इसका मुख्य कारण खाता खोलने की सरल प्रक्रिया, स्मार्टफोन का व्यापक उपयोग और अनुकूल बाजार प्रतिफल है । पिछले पांच वर्षों में डीमैट खातों की संख्या चार गुना से अधिक हो गई है, जो 2020 में 5 करोड़ से बढ़कर 2025 में 21.6 करोड़ हो गई ।
मांग खातों के मामले में हमारी पैठ पहले से ही अच्छी है और ग्राहक हासिल करने के लिए बड़े ब्रोकरों के अतिरिक्त खर्च करने का फायदा नहीं हो रहा है । इसलिए, ग्राहक जुटाने से सीधा लाभप्रदता पर असर हुआ है । ब्रोकरों की लाभप्रदता में दो समस्याएं हैं । एक तो बाजार की स्थितियों के कारण समग्र कारोबार कम है और दूसरी अधिग्रहण लागत बढ़ गई है ।
डीमैट खातों की वृद्धि के लिए एकमात्र सकारात्मक पहलू 2025 में सार्वजनिक पेशकशों (आईपीओ) में तेजी आना थी । पिछले वर्ष 103 कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाए । बड़ी संख्या में निवेशक मूल रूप से आईपीओ में भाग लेने के लिए डीमैट खाते खोलते हैं । निवेशक अपने परिवार के सदस्यों के भी नए डीमैट खाते खोलते हैं ताकि आईपीओ में आवंटन की संभावनाएं बढ़ जाएं । आने वाले समय में डीमैट खातों की वृद्धि इक्विटी से बेहतर रिटर्न पर निर्भर करेगी ।
पिछले चार वर्षों में डीमैट खातों में भारी उछाल आई है । हो सकता है कि यह कुछ समय के लिए स्थिर हो जाए और फिर एक और उछाल आए । भारत में इक्विटी में सीधे निवेश करने वालों की संख्या कुल जनसंख्या के मुकाबले अन्य देशों की तुलना में कम है । अगले साल डीमैट खातों में उतनी वृद्धि नहीं भी हो सकती है क्योंकि हम बेंचमार्क सूचकांकों में 10-12 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं ।
