सरकार ने हाल ही में स्पष्ट किया कि लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) कर को खत्म करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी दी। चौधरी ने 20 जुलाई को लोकसभा सदस्य आनंद भदौरिया के सवाल के लिखित जवाब में कहा कि इक्विटी पर 12.5 फीसदी एलटीसीजी दर घरेलू और खुदरा निवेशकों के साथ-साथ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए भी उतनी ही है।
सरकार का यह जवाब बाजार के कुछ प्रतिभागियों की एलटीसीजी कर में कटौती की मांग के बीच आया है। चौधरी ने बताया कि सरकार ने आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के जरिए सिर्फ सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई के लिए कर नियमों को तर्कसंगत बनाया है। इसके तहत ऐसे निवेशों को ब्याज या पूंजीगत लाभ पर लगने वाले आयकर से छूट दी गई है। यह छूट 1 अप्रैल से लागू है।
इस कदम से सरकारी प्रतिभूतियों पर कर व्यवस्था कई देशों के समान हो जाएगी। इससे पेंशन फंड, बीमा कंपनियों और सोवरेन वेल्थ फंड जैसे लंबे समय तक निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों की स्थिर और व्यवस्थित पूंजी की आवक सुनिश्चित होगी।
वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार को एलटीसीजी कर से 1.29 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो पिछले साल के 72,249 करोड़ रुपये से करीब दोगुना है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के आंकड़े अभी आने हैं। उन्होंने बताया कि सालाना बजट प्रक्रिया के तहत बड़े आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर पूंजीगत लाभ कर एवं अन्य कर की दरों की समीक्षा की जाती है।
