RNI No.: MPBIL/2015/64672   |   Po. Reg.: Malwa Division/345/2024-2026

एनसीडीईएक्स ने एनडीईएक्स और फिनडेक्स नामक दो सूचकांक शुरू करते हुए इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव बाजार में कदम रखा। इस एक्सचेंज को पहले नैशनल कमोडिटीज ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज के नाम से जाना जाता था। उसका यह कदम विविधीकरण और विस्तार का हिस्सा है। जिसके तहत यह कृषि जिंसों के एक्सचेंज से आगे बढ़कर व्यापक मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता बनने की राह पर बढ़ रहा है।

एनडीईएक्स असल में एनएसई पर सूचीबद्ध शीर्ष 60 कंपनियों में से चुनी गई 20 बड़ी और लिक्विड भारतीय शेयर कंपनियों का एक बेंचमार्क है। फिनडेक्स में वित्तीय क्षेत्र के 15 शेयर शामिल हैं, जिनमें बीमा कंपनियां नहीं जोड़ी गई हैं। इस सूचकांक के शेयरों का चयन पावर शीर्ष 40 कंपनियों में से किया गया है। शेयरों को संयुक्त स्कोर के आधार पर रैंक किया जाता है। इसमें फ्री फ्लोट बाजार पूंजीकरण और औसत दैनिक ट्रेडेड वैल्यू को 30-30 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है, जबकि बीटा और वोलैटिलिटी को 20-20 प्रतिशत वेटेज मिलता है। इस प्रणाली का उद्देश्य कंपनी के आकार, ट्रेडिंग गतिविधियों और बाजार के प्रति शेयर की संवेदनशीलता को एक साथ जोड़ना है। किसी भी रीबैलेंसिंग के दौरान कोई भी एक शेयर 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। एक्सचेंज का कहना है कि इस सीमा से विविधीकरण बेहतर बनेगा और किसी एक शेयर पर अत्यधिक निर्भरता का जोखिम कम होगा। सूचकांकों की समीक्षा और पुनर्संतुलन साल में दो बार मार्च और सितंबर में किया जाएगा। कुछ विशेष परिस्थितियों में इनमें आवश्यकतानुसार फिर से बदलाव करने का प्रावधान भी होगा।

‘एनडीईएक्स और फिनडेक्स की शुरुआत एनसीडीईएक्स के एक मल्टी-सेगमेंट एक्सचेंज में बदलने की दिशा में बड़ी सफलता है।’ जैसे-जैसे भारतीय पूंजी बाजार का विस्तार हो रहा है और इसमें घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक भागीदारी बढ़ रही है, वैसे-वैसे पारदर्शी और अच्छी तरह से तैयार बेंचमार्क अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। साथ ही, इन सूचकांकों का उद्देश्य सोच-समझकर निवेश संबंधी निर्णय लेने में मदद करना और बाजार में कारोबारियों के लिए उपलब्ध साधनों में वृद्धि करना है।

एक्सचेंज ने हाल में म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में भी कदम रखा है। इसके अलावा, वह इक्विटी सेगमेंट की शुरुआत के साथ अपनी पहुंच और बढ़ाने की तैयारी में है। उम्मीद है कि जनवरी में बाजार नियामक से इसके लिए अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।

सूत्रों के अनुसार भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से मंजूरी मिलने के बाद एक्सचेंज अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इन सूचकांकों पर डेरिवेटिव की पेशकश कर सकता है।